हॉट सेक्स विद गुरु में अनुभव करें नया आयाम
हॉट सेक्स विद गुरु में अनुभव करें नया आयाम दोस्तो, मैं सुहानी. कहानी के पिछले भाग संचालक के साथ सेक्स का मौका मिला में आपने पढ़ा कि मैं चुदाई की शुरुआत करती हुई गौरव जी का लंड चूसने लगी थी. अब
हॉट सेक्स विद गुरु में अनुभव करें नया आयाम
दोस्तो, मैं सुहानी.
कहानी के पिछले भाग
संचालक के साथ सेक्स का मौका मिला
में आपने पढ़ा कि मैं चुदाई की शुरुआत करती हुई गौरव जी का लंड चूसने लगी थी.
अब आगे हॉट सेक्स विद गुरू कहानी:
मैंने गौरव जी को चूतड़ों से पकड़ा हुआ था और वे मेरा सिर पकड़े हुए अपना लंड पूरी लंबाई तक चुसवा रहे थे.
मैं गप्प … गप्प … करती हुई चूसे जा रही थी.
कोई 3-4 मिनट तक ऐसे ही चूसने का सिलसिला चलता रहा.
उनका लंड पूरे उफान पर था और मैं चुदने को बिल्कुल तैयार और बेकरार थी.
फिर मैंने उनका लंड अपने मुँह से निकाला और पूछा- और सेवा बोलो सरकार!
गौरव बोले- बस अब सेवा हम करेंगे आपकी.
उन्होंने मुझे कंधों से पकड़ कर ऊपर उठा लिया उसके बाद मुझे पीछे को धकेल कर कांच की दीवार से सटा दिया.
अब वे नीचे बैठ गए और एक मेरी एक जांघ अपने कंधे पर रख लिया.
उन्होंने मेरी चूत को अपनी जीभ से चूमना और चाटना शुरू कर दिया.
मुझे तो मानो असीम सुख का अहसास होने लगा, वे अपनी नुकीली जीभ से मेरी चूत को इतनी अच्छी तरह चाट रहे थे कि बस क्या बताऊं.
मेरी बस आंखें बंद थीं और मैं कांच से सिर लगाए बस ‘स्सी … स्सी … आहह … उफ़्फ़ … अहह गौरव जी आहह … करते रहो … स्सी … सी …!’ कहे जा रही थी.
मेरा पूरा बदन ऊपर नीचे फड़क रहा था और मुझे कुछ नहीं सूझ रहा था … बस आनन्द ही आनन्द मिल रहा था.
एक बार तो गौरव जी ने मेरा पानी ऐसे ही निकाल दिया.
झड़ने के बाद मैं थोड़ी शांत हुई और वे भी मुझसे अलग हो गए.
मेरी चुत भड़क उठी थी और मुझसे रुका नहीं जा रहा था.
मैंने कहा- गौरव जी, और कितना तड़पाओगे यार, चोद भी दो मुझे, अब और इंतज़ार नहीं हो रहा!
गौरव जी तुरंत खड़े होकर मेरे सामने आ गए और मेरा हाथ पकड़ कर सोफ़े पर ले आए.
उन्होंने कहा- लेटो जानेमन, अब करते है तुम्हारी जबरदस्त चुदाई.
मैं तुरंत सोफ़े से एक पैर लटका कर सिर किनारे पर रख कर लेट गयी और अपनी चूत को ऐसे ही रगड़ती हुई उनकी आंखों में देखने लगी.
मैं वासना से बोली- आओ ना गौरव जी, डाल दो ना मेरी चूत में अपना लंड!
गौरव जी मेरे ऊपर झुके और लंड चूत की सीध में सैट करके बोले- आई लव यू सुहानी जी!
उन्होंने एक झटके में मेरी चूत में पूरा लंड घुसा दिया.
उनका लंड मेरी चुत की एकदम जड़ में अन्दर जाकर टकराया, जिससे मुझे ऊपर को झटका लगा.
मेरी ज़ोर की ‘स्सी … मर गई.’ की आवाज निकली और मैंने गौरव जी के पेट पर अपना हाथ रख कर उनको रोकने की कोशिश की.
वे समझ गए और खुद ही रुक गए.
कुछ पल बाद मैंने गौरव जी को कसके पकड़ लिया और उनके लंड से चुदने के लिए रेडी हो गई.
मैंने अपनी गांड हिला कर लंड को चुत से चूमा तो गौरव जी मेरी चूत में लंड अन्दर बाहर करते हुए मुझे चोदने लगे.
उनका बड़ा लंड मेरी चूत को पूरी फैलाए दे रहा था और पूरी गहराई तक जा कर चुदाई कर रहा था.
मेरी आंखें आनन्द में बंद थीं और बस होंठों से स्सी … स्सी … आहह … आहह … निकल रही थी.
गौरव जी की जांघें मेरी जांघों से टकराने से कमरे में पट्ट-पट्ट की आवाज आ रही थी और मेरी चुदाई चालू थी.
ऐसे 4-5 मिनट की लगातार चुदाई के बाद जब दोनों की सांस फूल गयी तो गौरव जी रुक गए और लंड अन्दर पेले हुए ही आराम करने लगे.
गौरव जी ने मुझसे ऐसे ही ऊपर पड़े पड़े पूछा- मजा आ रहा है न मेरी जान?
मैंने कहा- हां गौरव, बहुत मजा आ रहा है, ऐसी चुदाई तो पता नहीं कब से नहीं हुई मेरी!
गौरव बोले- अभी तो देखती जाओ, वैसे कुछ सोचा था कि कितनों से चुदोगी आज?
मैंने कहा- आप चोद लें और इजाजत देंगे तो मैं और भी लोगों से भी चुदवाना चाहूँगी.
गौरव जी ने कहा- हां बिल्कुल, किसी का भी लंड लो.
वे खड़े हो गए.
उन्होंने मुझे इशारा किया तो मैं पलट कर सोफ़े पर घोड़ी बन गई और गौरव मेरे पीछे आ गए.
उन्होंने मेरी कमर को पकड़ा और चूत में लंड घुसा कर पूछा- ठीक है न चुदाई शुरू करूं?
मैंने पीछे गर्दन घूमा कर कहा- हां, सही घुस गया है, अब चोदो!
गौरव ने पटा-पट ज़ोर ज़ोर से धक्के मार कर मुझे चोदना शुरू कर दिया.
मेरे दूध झूलते हुए हिल रहे थे और मैं ज़ोर ज़ोर से ‘आह आहह आह … स्सी … स्सी … आहह गौरव जी मजा आ गया … आ…आहह … स्सी…. स्सी … आहह … आह …’ कर रही थी.
उनके जिस्म के मेरे जिस्म में टकराने से मेरे पूरे बदन में लहरें सी उठ रही थीं और कमरे में ज़ोर ज़ोर की पट्ट-पट्ट की आवाज आ रही थी.
मेरी चूत मुझे उनके लंड का आनन्द दे रही थी, उनके लंड ने मेरी चूत की दीवार को पूरी तरह से फैला रखी थी.
शायद इससे बढ़िया चुदाई किसी लड़की की नहीं हो सकती थी.
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गौरव किसी अरबी घोड़े की तरह ‘उम्महह … उमम्ह …’ करते हुए चुदाई कर रहे थे.
मैं- आहह … स्सी … आहह … गौरव जी… आई लव यू … अहह … स्सी … आह … और तेज़ चोदो!
मेरी चूत पूरी चिकनी हो गई थी और पट्ट-पट्ट के साथ पच्च-पच्च की आवाज भी आ रही थी.
लगभग 6-7 मिनट की लगातार चुदाई के बाद मैं बहुत बुरी तरह थक गई तो मैंने कहा- गौरव, रुक जाओ प्लीज … आह .. आहह … स्सी … चोद-चोद कर ही मार दोगे क्या … आह!
यह सुनकर गौरव जी को मुझे पर तरस आया तो वे रुक गए और वहीं सोफ़े पर बैठ गए.
मैं भी उनके बगल में बैठ गयी और हम दोनों हांफते हुए सुस्ताने लगे.
गौरव बोले- मजा आ रहा है ना जानेमन?
मैंने कहा- क्या जबरदस्त चोदते हो गौर, ऐसा लगता है सारी मेहनत मेरी चुत पर ही कर रहे हो!
हम दोनों कुछ देर और सुस्ताते रहे.
आखिरकार मैंने कहा- चलो फिर खत्म करते हैं … मुझे अभी औरों से भी तो चुदवाना है!
गौरव जी मुस्कुराने लगे और बोले- चलो जान फिर झुक जाओ.
मैं सोफ़े के सिरहाने पर हाथ रख कर झुक गयी और पीछे से गौरव जी ने लंड डाल दिया.
खड़े खड़े ही मेरी जबरदस्त चुदाई फिर से शुरू हो गयी.
मैंने कहा- आखिरी बूंद झड़ने तक रुकना मत.
पटा-पट ज़ोर के धक्को के साथ मेरी चुदाई चलती रही और मैं आनन्द में आंखें बंद किए आहह … आह … आ… अस्सी … स्सी … करती हुई चुदवाती रही.
बीच बीच में मैं आंखें खोल कर भी देख रही थी.
मेरे होंठों पर शैतानी भरी मुस्कान थी और होंठों पर ‘स्सी … सी …’ भरी कामुक सिसकारियां थीं.
इस बार मेरी चुदाई 10 मिनट तक लगातार चली और मेरी चूत फूल गई, वह उनके लंड को जकड़ी हुई थी, जिसमें वे अपना कड़क लंड अन्दर बाहर चला रहे थे.
आखिरकार मैं टिक नहीं पायी. कुछ 5-10 सेकंड को उनको रोक कर फच्च-फच्च फुव्वारा मारती हुई झड़ गयी और सोफ़े पर झुक गयी.
इधर गौरव जी भी चिकनी चूत में लंड पेलते हुए आखिरकार झड़ने के कगार पर पहुंच गए और एक ज़ोर की ‘आह …’ के साथ रुक गए.
उनका लंड चूत में फूल गया और अन्दर पिचकारी मारने लगा.
इसके साथ ही 3-4 झटके मारते हुए गौरव जी ने पूरा लंड मेरी चूत में खाली कर दिया और मेरी चुदाई का सुखद समापन हुआ.
इस जबरदस्त सेक्स के बाद और आराम करने के बाद मैं अपने कपड़े पहनने लगी, तो गौरव जी बोले कि इन्हें पहनने की क्या जरूरत है? ऐसे ही नंगी रहो ना.
मैंने कहा- ये लंदन नहीं है गौरव जी, इंडिया है.
गौरव जी ने कहा- पर इस जगह को तो लंदन ही बनवा दिया है तुमने, चलो तुम्हारा मन है तो पहन लो!
मैंने कहा- हां अभी पहन लेती हूँ, फिर आप बोलोगे तो दुबारा उतार दूँगी .. खुश!
गौरव जी बोले- हां चलेगा!
मैंने अपने कपड़े पहन लिए और शीशे में खुद को देख कर दुबारा अपना मेकअप ठीक किया.
मैं कहा- चलो देखते हैं चल कर कि हमारे बाकी मेहमान क्या कर रहे हैं.
हम लोग वापस आए तो देखा कुछ लोग लगे हुए है और कुछ का खत्म हो गया था तो वे आराम कर रहे थे.
मेरी कलाई घड़ी में रात के 12 बजने का समय हो रहा था.
गौरव जी स्टेज पर जाकर माइक पर बोले- तो मेरे प्यारे मेहमानो, जैसा कि मैं देख सकता हूँ कि आप सब पार्टी का असली मजा तो अब ले पा रहे हैं, लगे रहिए … कल दोपहर तक ये जगह अपनी ही है.
यह सुनकर सब लोग वापस अपने काम में लग गए.
मैं भी स्टेज से पैर लटका कर वहीं बैठी थी और लोगों की चुदाई देख रही थी.
गौरव जी भी मेरे बगल में आकर ऐसे ही बैठ गए.
फिर मैंने कहा- ऐसी पार्टी लंदन में आम होती होंगी ना गौरव जी?
गौरव बोले- नहीं ऐसा नहीं है, वहां भी आम शहरों की तरह ही है, कोई रंडीखाना नहीं है कि सब चुदाई करते फिर रहे हों.
मैंने कहा- फिर भी थोड़ा बहुत तो होता रहता होगा?
उन्होंने कहा- हां थोड़ा बहुत होता रहता है और थोड़ा बहुत तो तुमने यहां भी करवा ही दिया है.
मैंने कहा- मैं तो ऐसे ही अवार्ड मिलने की खुशी और जोश में बोलती चली गयी जो मुँह में आया और लोग सीरियस हो गए, खैर देखो ना … हम सब एक जैसे ही होते हैं. इस जगह से बाहर जाकर वही सामाजिक प्राणी बन जाएंगे और समाज की मर्यादाओं का पालन करेंगे. यहां सब तो ऐसे लगे पड़े हैं, जैसे खुले में जानवर लगे रहते हैं.
गौरव जी ने कहा- हां इंसान भी तो एक सामाजिक जानवर ही होता है.
मैंने कहा- हां वह तो है.
उस वक्त तक मुझे थोड़ी सी भूख लग आयी थी तो मैंने कहा- आप बैठ कर नज़ारे देखो, मैं कुछ खाकर आती हूँ.
गौरव जी ने कहा- हां जरूर.
मैं स्टेज से उतर के खाने की तरफ बढ़ गयी.
क्योंकि ये एक निजी पार्टी थी तो उस समय वहाँ कोई नौकर आदि नहीं था.
उधर सब कुछ खुद ही ले कर लोग लेकर खा रहे थे.
मेरे साथ 8-10 लड़के लड़कियां, आदमी औरतें भी थे. वे सब हल्का-फुल्का खाना खा रहे थे.
मैंने भी उनमें से कुछ से बात की.
उन्होंने मेरी कहानियों की तारीफ की.
मैंने भी उनके बारे में और उनकी कहानियों के बारे में जाना, फिर अपना खाना खाकर मैं वापस स्टेज के पास चली गयी.
घड़ी में रात के लगभग 2 बज गए थे और ज़्यादातर लोगों का सेक्स खत्म हुए भी समय हो चुका था.
कुछ लोग आधे या पूरे नंगे कुर्सियों पर बैठे गप्पें मार रहे थे.
इधर मैं भी गौरव जी के साथ स्टेज से पैर लटका कर बैठी हुई थी और हम दोनों अपने अपने बारे में थोड़ी बहुत बातें कर रहे थे.
उसी वक्त एक 20-22 साल का लड़का आया और बोला- सुहानी जी, मैं आपकी कहानियों का बहुत बड़ा फैन हूँ … सच में आपकी कहानियां बहुत मजेदार होती हैं.
मैंने कहा- थैंक्यू डियर.
उसने आगे कहा- मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि कभी आपको असल जिंदगी में भी देखूँगा.
मैंने मुस्कुराते हुए कहा- चलो तुम्हारा एक सपना तो पूरा हो गया.
उसने कहा- अगर आप चाहो तो एक सपना और पूरा कर सकती हो मेरा!
मैंने समझते हुए कहा- अच्छा … और कौन सा सपना?
उसने कहा- आपके साथ एक बार सेक्स करने का!
तो गौरव भी मुस्कुराने लगे और बोले- और जगाओ इनकी वासना, अब ठंडी भी करनी पड़ेगी.
मैंने उस लड़के से कहा- पर डियर मैंने तो कर लिया है, आप कोई और साथी देख लीजिये … यहां तो मेला लगा हुआ है.
पर गौरव जी मुझे छेड़ने के अंदाज़ में बोले- अरे नहीं सुहानी, अपने प्रशंसक को मना नहीं करते.
मैं गौरव जी को देख कर हल्की सी नकली गुस्से में गुर्राई तो गौरव जी और हंसने लगे.
फिर गौरव जी ने माइक लेकर कहा- हां तो मेरे प्यारे दोस्तो, आज आपके पास मौका है अपने अपने पसंदीदा लेखकों और लेखिकाओं के साथ अपने सपने पूरे करने का. जो जिसका फैन है, वह उससे बात करे और मना ले, ये रात दुबारा नहीं आएगी.
यह सुनकर मैं थोड़ा चौंक भी गयी और उत्सुक भी हो गई थी.
फिर सब लोग अपने अपने पसंद के लेखकों को ढूंढने में लग गए.
कुछ ही मिनटों में 3-3, 4-4 के जोड़ों में लोग इक्कठे हो गए.
मेरे साथ कम से कम 10 आदमी और लड़के खड़े थे.
मैं ये देख कर हैरान थी.
मैंने कहा- ओ तेरी ये सब क्या है, इतना टाइम नहीं है कि सबको मौका दूँ!
गौरव जी बोले- सुहानी, मेरा कब से मन था तुम्हें गैंग-बैंग चुदाई में देखने का .. लगता है आज मन की मुराद पूरी हो जाएगी.
मैंने कहा- मतलब सब एक साथ?
एक लड़का बोला- हां सुहानी, गैंगबैंग तो उसी को बोलते हैं … क्या आप गौरव जी की ये इच्छा भी पूरी नहीं कर सकतीं … उन्होंने आपको इतना बड़ा अवार्ड दिया है!
मैंने मुस्कुराते हुए कहा- मुझे लगा अवार्ड मेरी मेहनत का है.
गौरव जी बोले- जी अवार्ड आपकी मेहनत का ही है जो की थी … और जो अब करोगी, उससे आपकी क्वालिटी साबित होगी. मान जाइए सुहानी जी. वैसे भी आपके ही उकसाने पर देखो न ये सब लोग आपस में लग गए हैं! अपने प्रशंसक का दिल रखने के लिए आप इतना नहीं कर सकतीं?
मैंने भी सोचा कि चल बेटा सुहानी और क्या उम्मीद की जा सकती है इन सब लोगों से … ये सब अपने सपनों की रानी को क्या ऐसे ही जाने देंगे? चल झुक जा और कर दे सबकी हसरत पूरी!
मैंने मुस्कुराते हुए कहा- अब गौरव जी आपके लिए इतना तो कर ही सकती हूँ.
मैं खड़ी होकर स्टेज के बीच में आ गई और माइक लेकर बोली- ठीक है दोस्तो, जो भी मुझे चोदना चाहता है … स्टेज पर आ जाए और कर ले अपनी हसरत पूरी!
कुछ ही देर में वहां 5-6 लोग और आ गए.
अब मैं स्टेज पर तेज़ रोशनी के बीच खड़ी थी और वहां 14-15 लोगों की भीड़ खड़ी थी.
वे सब के सब एक साथ मेरे पास आ गए और मुझे घेर लिया.
मैंने कहा- मैंने कभी भी ये सब नहीं किया है तो थोड़ा आराम से!
एक बोला- आराम हराम होता है सुहानी जी … तो हम तो वैसे ही हरामपने से सेक्स करेंगे!
वे सब मुझ पर एक साथ टूट पड़े.
पता नहीं कितने लोगों के हाथ मेरे जिस्म पर ऊपर नीचे चलने लगे और मैं भी उन सबके स्पर्श से उत्तेजित होने लगी.
उन सब लोगों में से किसी ने भी अभी तक मेरे कपड़े नहीं उतारे थे, पर ऊपर ऊपर से मेरा चेहरा, मेरी छाती, मेरे पेट, कमर, कूल्हे, जांघें सब जगह हाथ चला रहे थे और मेरा जिस्म मसल रहे थे.
मैं उन सब के स्पर्श से बहुत ज्यादा उत्तेजित भी हो रही थी.
दोस्तो, हॉट सेक्स विद गुरू कहानी के अगले भाग में आपको मेरा गैंग बैंग पढ़ने को मिलेगा.
प्लीज मेल जरूर लिखें.
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