रात भर अपनी गर्लफ्रेंड की आग बुझाई
बारिश की रात थी। मेरा फ्लैट पूरी तरह अंधेरा था, सिर्फ बाहर सड़क की लाइट और खिड़की से आती बारिश की आवाज़।
प्रिया मेरे साथ सोफे पर बैठी थी। आज वो मेरे पास रुकने आई थी – मम्मी-पापा को बताया था कि फ्रेंड के यहाँ प्रोजेक्ट है।
उसने काली टाइट टॉप पहना था और नीचे हल्की ग्रे शॉर्ट्स। टॉप इतना फिट था कि उसके हर कर्व साफ उभर रहे थे। बारिश में भीगकर आने की वजह से उसके बाल गीले थे और वो बदन पर चिपके हुए थे।
मैंने उसे देखते ही कहा, “तू आज बहुत हॉट लग रही है…”
प्रिया ने शरमाते हुए मुस्कुराई और मेरे सीने पर सिर रख दिया। “तो कर भी ले ना कुछ… इतनी देर से बस देख रहा है।”
मैंने उसका चेहरा ऊपर किया और होंठ उसके होंठों पर रख दिए। पहला किस हल्का था, लेकिन दो सेकंड बाद ही वो गहरा हो गया। उसकी जीभ मेरे मुँह में घुस आई। हम दोनों एक-दूसरे को ऐसे चूम रहे थे जैसे दुनिया खत्म होने वाली हो।
मेरा हाथ धीरे-धीरे उसके टॉप के नीचे गया। उसकी कमर गर्म थी। मैंने टॉप ऊपर किया तो उसकी काली लेस वाली ब्रा दिखी। मैंने ब्रा के ऊपर से ही उसकी छातियाँ दबाईं। प्रिया ने आह भरी और मेरे कान में फुसफुसाई – “जोर से दबा… मुझे अच्छा लगता है जब तू रफ होता है…”
मैंने ब्रा के हुक खोल दिए। उसकी गोरी-गोरी, मुलायम छातियाँ मेरे सामने थीं। निप्पल्स पहले से ही सख्त हो चुके थे। मैंने एक को मुँह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। दूसरी तरफ हाथ से दूसरी छाती को मसल रहा था।
प्रिया की सिसकारियाँ बढ़ने लगीं – “आह्ह… हाँ… ऐसे ही… चूस और जोर से… हाय…”
फिर मैं नीचे सरका। उसकी शॉर्ट्स उतारी। अंदर सिर्फ काली पैंटी थी – वो भी पूरी तरह गीली हो चुकी थी। मैंने पैंटी को साइड किया और जीभ से चाटना शुरू कर दिया।
प्रिया का बदन काँप उठा। उसने मेरे बाल पकड़ लिए और मेरे सिर को अपनी चूत पर दबाया। “अंदर तक… जीभ डाल… हाँ… ऐसे ही… ओह्ह्ह…”
कुछ मिनट बाद वो रुक नहीं पाई। उसने मुझे ऊपर खींचा और मेरी पैंट खोल दी। मेरा लंड पहले से ही पूरा सख्त था।
प्रिया ने उसे हाथ में लिया, ऊपर-नीचे किया और फिर मुँह में ले लिया। वो ऐसे चूस रही थी जैसे सालों से भूखी हो। मैं सिहर रहा था।
“बस… अब और नहीं…” मैंने कहा। प्रिया हँसी और बिस्तर पर लेट गई। टाँगें फैलाकर बोली – “आजा… मुझे पूरी तरह अपनी बना ले आज…”
मैं उसके ऊपर चढ़ गया। अपना लंड उसके गीले छेद पर रखा और धीरे से अंदर डाला। “आह्ह्ह… कितना मोटा है तेरा…” प्रिया ने आँखें बंद करके कहा।
पहले धीरे-धीरे धक्के दिए। फिर रफ्तार बढ़ी। बिस्तर हिलने लगा। प्रिया की चीखें कमरे में गूँज रही थीं – “और जोर से… फाड़ दे मुझे… हाँ… ऐसे ही… गहरा… और गहरा…”
मैंने उसकी टाँगें अपने कंधों पर रखीं और पूरी ताकत से धक्के मारने लगा। प्रिया की छातियाँ उछल रही थीं। उसने मेरी पीठ पर नाखून गड़ा दिए।
“आ रहा है… हाय… साथ में… साथ में ही…”
अगले ही पल प्रिया का बदन काँप उठा। उसकी चूत सिकुड़ने लगी। मैं भी रुक नहीं पाया। जोर से धक्का मारा और उसके अंदर ही गरम-गरम झड़ गया।
हम दोनों हाँफते हुए एक-दूसरे से लिपटे रहे। पसीना, बारिश की ठंडक और हमारी साँसें… सब मिलकर कमाल का माहौल बना रहे थे।
काफी देर बाद प्रिया ने मेरे कान में फुसफुसाया – “कल फिर आएगी… और इस बार और ज्यादा देर तक रुकूँगी…”
मैंने बस उसके माथे पर किस किया।
हम दोनों जानते थे… ये रातें अब हमारी आदत बनने वाली हैं।
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