चूत में कॉपर टी लगाने वाले डॉक्टर से चुदी
मैं बिग सेक्स विद डॉक्टर कहानी में डॉक्टर से कॉपर टी लगवाने गया तो उसने मुझे नंगा कर लिया। मैं मेरी चूत चाटी। फिर मैंने चूत मरवाना शुरू किया।
Hello मित्रों, फिर से मेरी यौन कहानी में आपका स्वागत है। मैं एक युवा डॉक्टर के साथ अपने यौन संबंधों की कहानी आपको सुन रहा था।
जैसा कि आपने पहले भाग में पढ़ा था, कहानी में गाईनी डॉक्टर ने मेरी चूत चाटकर मजा दिया, डॉक्टर ने कॉपर-टी लगाने के बहाने मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया, जो मुझे बहुत नागवार गुजरा था।
मैंने अपनी चुत में उसका लंड अच्छा लगने के बावजूद भी उसे धक्का दिया।
अब बिग सेक्स कहानी डॉक्टर से:
मेरे धक्का मारने से वह डॉक्टर की अल्ट्रासाउंड मशीन से पीछे टकराया, लेकिन अगले ही क्षण वह खुद को संभालकर मेरी तरफ बढ़ा।
वह मेरे पास आते ही मैंने अपना दायां पैर उसकी छाती पर रखकर उसे रोक दिया।
मुझे देखकर वह चकित हो गया।
उसे शायद लगता था कि मैं चुदाई के खेल में हूँ। उसने तुरंत मेरी जांघें पकड़कर लंड घुसाने की कोशिश की, फिर मेरे पैर को झटका।
मुझे इस खेल में मज़ा आ रहा था, लेकिन मेरा गुस्सा साफ दिखाई दे रहा था।
मैंने पूरी ताकत से उसे पीछे धकेला और अपनी पैंटी पहनने लगी. मैंने दोनों हाथ उसके सीने पर लगाए।
मेरी प्रतिक्रिया काफी थी कि अब उसे चूत नहीं मिलेगी।
मैं पैंटी पहनने के लिए झुकते ही उसने मेरे बाल पीछे से पकड़कर मुझे टेबल पर पटक दिया।
दो सेकंड तक मैं कुछ समझ नहीं पाया। उसने एक हाथ मेरे बाएं हाथ से निकालकर मेरे बाएं चूचे को पकड़ लिया और दाएं हाथ से मेरी गर्दन को टेबल पर दबाकर रखा जब तक मैं खुद को संभाल नहीं पाया।
इसके बाद उसने पीछे से मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया।
वह मुझे टेबल के सहारे खड़ा करके पीछे से चोदने लगा।
वह पूरी तरह रफ सेक्स मूड में आ चुका था और पागलों की तरह मेरे बाल पकड़कर दनादन मेरी चूत की ठुकाई कर रहा था, जो बहुत मनोरंजक पोजीशन थी।
हर झटके से कमरा गूँज रहा था।
अगले ही क्षण, उसने मेरी गर्दन से हाथ हटाकर मेरे दाहिने चूतड़ पर कठोर चांटा मारा।
उसका चांटा इतना ज़ोरदार था कि मैं चीख पड़ा, लेकिन उसकी पकड़ ढीली होने से मुझे भागने का अवसर भी मिला।
मैंने पूरी ताकत से घूमी, दोनों हाथ टेबल पर टिका कर, जिससे उसका लंड मेरी चूत से बाहर निकल गया।
मैंने पूरी ताकत से उसके मुँह पर एक तमाचा जड़ा, जब वह अपने लंड को वापस छेद में सैट करने पर था।
चांटे की तेज आवाज़ शायद पूरे क्लिनिक के कर्मचारियों ने सुन ली होगी।
डॉक्टर भी मेरी इस प्रतिक्रिया से सहमत हो गया और आश्चर्य से मेरा मुँह ताकता रह गया।
तमतमाते हुए मेरे मुँह से निकला, "मादरचोद रंडी मुझे समझा है क्या?"
इस सब की उसे बिल्कुल उम्मीद नहीं थी।
वह चुपचाप खड़ा रह गया। उसे समझ में नहीं आया कि क्या करना चाहिए।
मैंने उसके लंड को केले से एक सेकंड में छुआरा बनते देखा।
मैं गुस्से में अपने कपड़े पहनने लगी और उसे वहीं अवाक सा खड़ा छोड़ दिया।
तभी उसने कहा, "मुझे माफ कर दीजिए..।" मैं शायद आपके व्यवहार को गलत समझा। मैं भावुक हो गया। मैं ऐसा करना नहीं चाहिए था!
मैं उसे गुस्से में घूरती रही, कुछ नहीं बोली।
डॉक्टर, कृपया मुझ पर भरोसा करो। मैं ऐसा नहीं हूँ। मैं बहुत गलत था!
मैं अब भी कुछ नहीं कहा, बस टॉप को चूचों पर चढ़ाकर केबिन से बाहर निकलने लगी।
वह मेरे पैरों में गिर पड़ा और रोते हुए कहा कि जो कुछ हुआ, वह गलतफहमी के चलते हुआ। उसके लिए मुझे ऐसी सजा मत दीजिए, कृपया। मैं एक प्रसिद्ध चिकित्सक हूँ!
शायद उसे लग रहा था कि अगर मैं उसके खिलाफ कोई शिकायत नहीं करूँगा तो उसका करियर खत्म हो जाएगा।
मैं भी उस पर दया करने लगा जब मैंने देखा कि वह इतना गिड़गिड़ाती थी।
मैंने उसे उठने को कहा, लेकिन वह गुस्सा जारी रखा।
अब मैं आपको कोई परेशानी नहीं दूँगा, वह खड़ा हो गया। तुम्हारा लक्ष्य पूरा करो!
वह इतना कहकर खुद केबिन से निकल गया और मुझे वहीं रुकने को कहा।
अगले ही मिनट, एक नर्स आई और मुझे बैठने को कहा।
मैं वापस उसी टेबल पर बैठ गया जहां कुछ मिनट पहले मेरी चुदाई हुई थी।
अगले कुछ मिनटों में, नर्स ने मेरी पैंटी उतारी और कॉपर-टी मेरी चूत में डाल दी।
जब वह अपना काम पूरा कर चुकी थी, तो नर्स मुझे पैंटी पहनने को कहा और केबिन से निकल गई।
नर्स के जाने के बाद मैं भी पैंटी पहनी हुई बाहर चला गया।
डॉक्टर दरवाजा खोलने से पहले ही केबिन में घुस गया।
वह प्रवेश करते हुए कहा: "नर्स ने बताया कि आपका काम सफल हो गया है, इसलिए आपको अनचाहे गर्भ की चिंता करने की कोई जरूरत नहीं होगी!"
मैं—ठीक है, धन्यवाद!
उसने फिर कहा, जब मैं दरवाजे की ओर बढ़ा।
मैंने संदेहपूर्ण निगाहों से उसकी तरफ देखा।
डॉक्टर, मैं बहुत शर्मिंदा हूँ...। सब कुछ अच्छा नहीं हुआ। आपके चरम सुख का अनुभव करने के बाद मुझे अपना खुद का आनंद लेना प्राकृतिक लगता था। मैं अपनी अनुमति के बिना ऐसा कर बैठा। मेरी कभी कोई गर्लफ्रेंड नहीं रही, इसलिए मैं लड़कियों की भावनाओं को नहीं जानता। हो सके तो मुझे माफ करना।
उसने एक सांस में इतना बोलकर अपने हाथ जोड़ लिए।
उस बेचारे की स्थिति पर मुझे अब गुस्सा आ रहा था।
वह ठीक था..। और वैसे भी मैंने शुरुआत की थी।
मैं भी उस आदमी के साथ "केएलपीडी" हो गया।
अब तक मेरा क्रोध पूरी तरह शांत हो गया था।
मैं अपनी मुस्कान छिपाकर उसकी तरफ बढ़ा और हाथ उसके गाल पर रखा।
वह इतने में ही काँप गया, शायद उसे लगता था कि उसे फिर से थप्पड़ लगेगा।
तुम एक अच्छे आदमी हो, मैंने उसके गाल पर मुस्कुराते हुए कहा।
जब मैं उससे इतना नजदीक आ गया, मेरे होंठों की छुअन से उसके पैंट में फिर से उभार दिखने लगा।
सुधरोगे नहीं, मैंने मुस्कुराकर नीचे की ओर इशारा किया।
वह मेरा इशारा समझते ही झेंप गया और अपने हाथ से अपने लंड को दबा लिया, ताकि वह कड़ा नहीं दिखाई देता था।
मैंने उसका हाथ हटाकर उसके लंड के उभार पर अपना हाथ रखा। लंड अभी पूरी तरह खड़ा नहीं था, लेकिन करंट चलने लगा।
मैंने दोनों हाथ बढ़ाकर उसकी पैंट खोल दी और कच्छा भी नीचे खींच दी।
फिर मैंने देखा कि उसकी झांटें साफ थीं, उसका लंड आधा कड़क था और सांवला रंग था।
मैं उसे उसी टेबल पर ले गया, जिस पर उसने अपनी गांड टिका ली थी, और उसके सीने पर हाथ रखकर उसे धकेल दी।
मैंने उसके लंड को गोलियों के साथ पकड़ लिया और उसकी आंखों में देखा।
अब जब उसका लंड पूरी तरह कड़क हो गया था, उसके मुँह से कुछ नहीं निकल रहा था।
वह चाहते हुए भी मुझे नहीं छू रहा था।
वह फिर से ऐसा कुछ नहीं करना चाहता था, जिससे वह अनजाने में मुझे नाराज़ कर दे।
मैं टेबल से उसके सामने खड़ी हो गई।
मैंने उसकी गर्दन और कानों के आसपास उसके लंड और गोलियों को सहलाते हुए उसकी जांघों को चूमना शुरू किया।
कुछ ही देर में पत्थर की तरह सख्त हो गया।
मैंने सोचा कि ये अकेले कुछ नहीं करेगा, इसलिए मैं इसे जन्नत की सैर करवा दूँगा।
मैं घुटनों के बल उसके सामने बैठ गया और उसकी गांड और जांघों पर हाथ फिराने लगी।
मेरे मुँह के बिल्कुल सामने उसका लंड खड़ा था।
मैंने आगे बढ़कर उसकी गोलियों को चूम लिया और उसके लंड को सूँघा।
मैंने ऐसा करते ही उसके लंड ने एक झटका दिया और उसके मुँह से एक हल्की सिसकारी निकली, "आह"।
मैं अब उसे और अधिक परेशान नहीं करना चाहती थी, इसलिए मैंने एक हाथ से उसकी गोलियां पकड़ी और दूसरे हाथ से उसका लंड पकड़ा।
वह उत्सुक होकर मेरी तरफ देख रहा था, मांग कर रहा था कि मेरे लंड को एक बार अपने होंठों में डाल दो।
उसकी तरफ आंख मारते हुए मैंने अपने होंठ खोले और उसका पूरा लंड अपने गले में डाल दिया।
लंड पर मेरे होंठों की गर्मी महसूस करते ही उसके शरीर में कंपकंपी-सी दौड़ गई।
उसने मुँह खोला और आंखें बंद कर दीं।
मैं दोनों हाथों से उसके गोलियों और लंड को धीरे-धीरे सहलाती हुई अपना मुँह आगे-पीछे हिलाती हुई उसके पूरे लंड को मसाज करती थी।
वह टेबल पर दोनों हाथ टिकाकर मेरे मुँह के मजे ले रहा था।
वह आंखें बंद करके इस क्षण का पूरा मनोरंजन बटोर रहा था, जबकि मेरे मुँह से सुड़ुप सुड़ुप की आवाज़ निकल रही थी।
उसका लंड बिल्कुल कड़क हो गया था, लेकिन उसने अपनी तरफ से कुछ नहीं किया।
उसने न हाथों से छूने की कोशिश की, न कमर हिलाने की कोशिश की।
शायद वह अभी भी भयभीत था।
मैंने उसके दोनों हाथ पकड़े और उसके सिर के पीछे लंड और गोलियां छोड़ दीं।
उसने ऐसा करते ही अपनी आंखें खोलकर मेरी ओर देखा।
मैं अपनी तरफ देखते ही वह मुस्कुराकर मेरे खुले बालों को पीछे से चोटी-सी बनाकर पकड़ लिया।
मैंने भी उसके चूतड़ों पर हाथ रख लिया और मुँह हिलाना बंद कर दिया जब मैंने उसके हाथों से काम करते देखा।
मेरे रुकने पर वह थोड़ा भ्रमित होकर मेरी तरफ देखने लगा।
उसकी गांड से पकड़कर मैंने अपनी जीभ और गालों से उसके लंड को निचोड़ते हुए उसे अपनी ओर खींचा, जिससे उसका लंड सीधा मेरे गले में टकराया।
वह मेरा संकेत समझते ही खुश हो गया और मेरे दोनों हाथों से मेरे बाल पकड़कर कमर हिलाकर मेरे मुँह चोदने लगा।
उसके चेहरे पर प्रसन्नता का कोई भाव नहीं था।
उसकी खुशी जल्दी ही हैवानियत में बदल गई।
उसके हाथों की पकड़ और कमर के झटके तेज हो गए।
मैंने भी अपनी छाती को आगे बढ़ाकर अपने चूचे उसकी जांघों पर सटाते हुए अपनी क्रॉप टॉप को चूचों से नीचे खिसकाया।
जब मैंने ऐसा किया, वह जानवरों की तरह व्यवहार करने लगा।
उसने मुस्कुराते हुए मेरे बालों को कसकर पकड़ लिया और जबरदस्ती अपने लंड को मेरे मुँह में डालने लगा।
उसका लंड हर बार मेरे गले तक गिरता था।
मेरा मुँह घुटी-घुटी सी चीख रहा था।
हम दोनों की मिली-जुली आवाजों ने केबिन को बहुत गर्म बना दिया।
दर्द भी था और मैं दम घुट रहा था।
लेकिन अब मैं अपने पिता की ऐसी ही मुख चुदाई से अभ्यस्त हो गया था।
मैंने उसे कुछ समय तक संभालते हुए झड़ने का अवसर देना ही बेहतर समझा।
वह पागलों की तरह मेरा मुँह चोद रहा था।
अब उसका लिंग अकड़ने लगा।
मौका मिलते ही मैंने अपनी दाहिने उंगली को उसकी गांड के छेद में डाल दिया।
वह मेरी इस कार्रवाई से संभल नहीं पाया और अपनी कमर अकड़ने लगी।
उसने मेरे सिर को बालों से खींचते हुए अपने लंड पर पूरी ताकत से दबाया और अपने लंड का सुपाड़ा मेरे गले तक पहुँचाया।
वह अकड़ गया और झड़ने लगा जब उसका लंड मेरे गले की गहराई तक पहुंच गया।
उसकी कमर रुक चुकी थी, लेकिन उसका लंड लगातार झड़ रहा था।
उसके माल की हर एक बूंद सीधे मेरे पेट में चली गई।
मैंने नहीं देखा, लेकिन मुझे लगता था कि एक साधारण लंड से दो गुना माल निकला होगा।
इस सब के बीच मेरी सांस बहुत देर तक घुटती रही, जिसे मैं बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था।
वह होश में आया जब मैंने उसकी गांड से उंगली निकालकर उसकी जांघ पर हल्के-हल्के लेकिन निरंतर थप्पड़ मारा।
होश में आते ही उसने मेरे बाल छोड़ दिए और कहा, ओह मेरे गॉड, मैं माफी चाहता हूँ।
उसकी पकड़ टूटते ही मैंने उसके लंड को छोड़ दिया और गहरी सांस लेकर अपनी सांसें नियंत्रित करने लगी।
तुम ठीक हो? उसने झुककर मेरे बाल संवारते हुए पूछा।
हां में सिर हिलाकर मैंने उसकी तरफ देखा।
तो उसने कहा, "सॉरी, मैं बहुत परेशान हो गया था!"
मैं सिर्फ मुस्कराकर कहा, "कोई बात नहीं!"
यह सुनकर उसकी साहस थोड़ी बढ़ी और वह खड़ा हो गया।
उसकी लार और उसके माल के मिले-जुले धागे अभी भी उसके लंड पर लटक रहे थे।
यह देखकर, मैंने अपनी जीभ से उसका लंड कुतिया की तरह चाट-चाटकर साफ कर दिया।
लंड साफ करने के बाद मैं उठी और अपने कपड़े और बाल साफ करने लगी: "ठीक है, मैं अब चलती हूँ।"
यह सुनकर उसे लगा कि चूत चोदने का अवसर अब नहीं मिलेगा।
उसने अपनी पैंट भी ऊपर की और मुझे धन्यवाद कहा।
मैं सिर्फ मुस्कुराया और इस पर कुछ नहीं कहा।
डॉक्टर, दोबारा मिलने का समय क्या है?
मैं नहीं जानता।
डॉक्टर, आपको प्रतिदिन चेकअप कराना होगा। रोग होने की पुष्टि करनी चाहिए।
मैं देख रहा हूँ।
डॉक्टर, कृपया अपना नंबर बताओ।
मैंने एक क्लिनिक देखा है क्योंकि मुझे कुछ समस्याएं होंगी।
यह कहकर मैं दरवाजे की ओर चला गया।
जैसे ही मैंने दरवाजा खोला, मेरा ध्यान कैमरे पर चला गया।
मुझे पता नहीं था कि इस कमरे में सीसीटीवी कैमरा था, इसलिए मेरी हर रंडपने की हरकत रिकॉर्ड हो गई होगी।
मैं तुरंत डॉक्टर की ओर मुड़ी और पूछा कि क्या यहां एक कैमरा लगा हुआ है। आपने क्यों नहीं बताया?
यह सुनकर उसका चेहरा शैतानी मुस्कुराया।
लेकिन मेरे गुस्से से तमतमाते चेहरे को देखते ही उसकी मुस्कान एक झटके में चली गई।
वह जानता था कि मैं गुस्सा हो रहा हूँ, इसलिए वह हाथ जोड़कर कहा, "प्लीज, गुस्सा मत करो।" डरने की कोई बात नहीं, मेरे क्लिनिक में हर जगह कैमरे हैं। मेरे पास ही एक्सेस है। किसी को देखने की आवश्यकता नहीं है आखिरकार, मेरे करियर में भी समस्याएं हैं..। और मैं तुरंत सारी फुटेज डिलीट कर सकता हूँ अगर आप चाहें। प्लीज..। गुस्सा नहीं करो।
यह सुनकर मुझे कुछ तसल्ली हुई।
पास ही पड़े एक कागज पर मैंने अपनी ईमेल आईडी लिखने के लिए पेन निकाला।
मैंने कहा कि आज की सभी फुटेज मुझे मेल करें और फिर फेंक दें।
मैं घर चली गई जब उसने हामी भर दी।
मैं बिग सेक्स विद डॉक्टर कहानी के बाद क्या हुआ, उसकी पूरी कहानी अगले भाग में आपको बताऊँगा।
कृपया मुझे बताएं कि आपको मेरी यौन कहानी कैसी लगती है।
आपका प्यारा गुरु
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